Wednesday, April 9, 2008

एंटीबायोटिक तक पचा जाते हैं कुछ बैक्टीरिया

जंगल में शिकारी को तो शिकार बनते अक्सर देखा है लेकिन अब बैक्टीरिया जैसे छोटे जीव भी शिकारी की भूमिका में आ गए हैं। भूल जाइए एंटीबायोटिक दवाओं को क्योंकि वैज्ञानिकों ने अब कुछ सुपर रेसिस्टेंट बैक्टीरिया खोज निकाले हैं। ये ऐसे बैक्टीरिया हैं जिनपर न सिर्फ एंटीबायोटिक बेअसर साबित हो रही हैं बल्कि उल्टे बैक्टीरिया उन्हीं को खाने लगते हैं। हॉवर्ड मेडिकल स्कूल के शोधकर्ताओं ने जॉर्ज एम. चर्च की अगुवाई में ऐसे 400 बैक्टीरिया खोज निकाले हैं। ये दवाओं से ही कार्बन लेकर अपनी जरूरतें पूरी कर लेते हैं।

स्टडी के लिए वैज्ञानिकों ने 11 अलग-अलग जगहों की मिट्टी से बैक्टीरिया के नमूने लिए। इनमें मिनिसोटा के अल्फा- अल्फा और बोस्टन के शहरी इलाकों से लिए गए नमूने भी शामिल थे। शोधकर्ताओं ने इन्हें 18 नेचरल और सिंथेटिक एंटीबायोटिक दिए, इनमें पेनिसिलिन और सिप्रोफ्लॉक्सिन जैसी आम दवाएं भी शामिल थीं। नतीजों में देखा गया कि इन सभी दवाओं में बैक्टीरिया की बराबर बढ़त हुई थी।

शोधकर्ताओं के मुताबिक इन बैक्टीरिया को सुपर रेसिस्टेंट या महा प्रतिरोधक कहा जा सकता है, क्योंकि ये प्रतिरोध की सीमा से 50 गुना ज्यादा ताकतवर एंटीबायोटिक को भी बर्दाश्त कर गए। राहत की बात यही है कि इनमें से कोई भी बैक्टीरिया इंसानों में रोग पैदा करने वाला नहीं है। हालांकि कुछ बीमारी पैदा करने वाले बैक्टीरिया के नजदीकी रिश्तेदार जरूर थे। इसके अलावा अभी यह भी तसल्ली है कि फिलहाल बीमारियां फैलाने वाले किसी भी बैक्टीरिया में एंटीबायोटिक को शिकार बनाने की क्षमता नहीं है। वैज्ञानिकों के मुताबिक बैक्टीरिया को हमारे शरीर में ही पनपने के लिए काफी कुछ मिल जाता है।

इसके बावजूद इस स्टडी के नतीजे एक बड़े खतरे की ओर हमें आगाह जरूर करते हैं। एंटीबायोटिक पर पनपने वाले बैक्टीरिया की मौजूदगी बताती है कि नेचरल तौर पर इनमें इतनी प्रतिरोधक क्षमता भी होती है। चूंकि जीन्स के ट्रांसफर से यह खूबी बाकी बैक्टीरिया में आ सकती है इसलिए मुमकिन है कि इंसानों में बीमारी फैलाने वाले बैक्टीरिया मिट्टी में मौजूद अपने भाई बंधुओं से यह ताकत कभी भी पा जाएं।

2 comments:

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