Wednesday, September 19, 2007

मोबाइल से कैंसर होना संदिग्ध

मोबाइल फ़ोन के इस्तेमाल से सेहत पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को लेकर हुए ताज़ा अध्ययन में इससे कैंसर होने की संभावना को संदेह के घेरे में रखा गया है.

अध्ययन में कहा गया है कि हालाँकि मोबाइल के इस्तेमाल से दिमाग और कान पर कुछ असर हो सकता है.

लेकिन जहाँ तक कैंसर का सवाल है, तो इससे कैंसर होने की संभावना संदिग्ध है.

शोध में 10 से 15 साल तक मोबाइल इस्तेमाल करने वालों में आमतौर पर कैंसर के लक्षण नहीं दिखाई दिए.

अध्ययन

ब्रिटेन में 2001 में शुरु हुए टेलीफ़ोन और स्वास्थ्य शोध कायर्क्रम ने सर विलियम स्टीवर्ट की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट को सही बताया है.

सरकार और मोबाइल फ़ोन उद्योग द्वारा दिए गए 88 लाख पाउंड की आर्थिक सहायता वाले कार्यक्रम की एक स्वतंत्र प्रबंधन समिति भी है.

इस समिति के अधिकतर सदस्य विश्वविद्यालयों से लिए गए हैं. इसके तहत मोबाइल फ़ोन और बेस स्टेशन को लेकर 2001 के अंत में शुरु किए गए 28 में से 23 अध्ययन अब तक पूरे हो चुके हैं.

आशंका

इसके तहत किए गए कुछ अध्ययन बताते हैं कि मोबाइल फ़ोन के प्रयोग से मस्तिष्क और कान का ट्यूमर होने की आशंका अधिक है.

वहीं कुछ और शोध बताते हैं कि मोबाइल की रेडियो फ्रीक्वेंसी दिमाग को भी प्रभावित करती है, जिससे रक्त दाब और दिल की बीमारी जैसी समस्याएँ हो सकती हैं.

अध्ययन बताते हैं कि ये सभी समस्याएँ मोबाइल फ़ोन, कंप्यूटर और टेलीविज़न की देन है.

स्टीवर्ट ने 2000 में जारी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि मोबाइल के प्रयोग से कोई नुक़सान नहीं होता है.

उन्होंने इस संबंध में और अध्ययन की आवश्यकता बताई थी. वहीं 2005 में जारी अपनी रिपोर्ट में उन्होंने सलाह दी कि ऐहतियात के तौर पर आठ साल तक के बच्चों को मोबाइल की पहुँच से दूर रखना चाहिए.

असर

शोधकर्ता बताते हैं कि उनके अध्ययन में पिछले 15 साल से अधिक समय से मोबाइल का इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ता कम ही थे.

उन्होंने बताया कि आप कहाँ बैठकर मोबाइल से बात कर रहे हैं, इसका भी आपके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है.

अब तक इस अध्ययन पर 60 लाख पाउंड ख़र्च हो चुके हैं.

अब मोबाइल फ़ोन का बच्चों पर पड़ने वाले प्रभाव और इससे होने वाली गंभीर बीमारियों का अध्ययन किया जाएगा.

जिसके तहत कैंसर, अल्जाइमर और पारकिंसन जैसी बीमारियां होने की संभावना पता लगाई जाएगी.

इस अध्ययन में लगभग दो लाख लोगों को शामिल किया गया. इसमें ब्रिटेन के साथ-साथ डेनमार्क, फिनलैंड और स्वीडन के वैज्ञानिक भी शामिल थे.

अध्ययन में शामिल प्रोफ़ेसर लावरी चैलिस लोगों को सलाह देते हैं कि वे मोबाइल फ़ोन का सीमित प्रयोग करें.

3 comments:

deepanjali said...

आपका ब्लोग बहुत अच्छा लगा.
ऎसेही लिखेते रहिये.
क्यों न आप अपना ब्लोग ब्लोगअड्डा में शामिल कर के अपने विचार ऒंर लोगों तक पहुंचाते.
जो हमे अच्छा लगे.
वो सबको पता चले.
ऎसा छोटासा प्रयास है.
हमारे इस प्रयास में.
आप भी शामिल हो जाइयॆ.
एक बार ब्लोग अड्डा में आके देखिये.

way2matrimony said...

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marathimatrimony said...

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